लोक समाज पार्टी
गृहमंत्री अमित शाहजी आज मोदी सरकार का अप्रत्यक्ष इंमरजेंसी इंदिरा गांधी की इमरजेंसी ज्यादा खतरनाक है।
दोस्तों प्रणाम –देश के गृहमंत्री अमित शाहजी आज 26/6/2021 को दैनिक जागरण के संपादकीय पृष्ट पर अपने लेख लिखे है। जिसको मैने पढ़ा तो यही पता चला कि नेहरूजी से लेकर मनमोहन सरकार तक आपातकाल व वंशवाद का ही जिक्र किये हैं जो एक सच्चाई है ।लेकिन गृहमंत्रीजी ने मोदी सरकार की प्रशंसा करने मे पीछे नही रहे और वर्तमान भाजपा शासन में हुये प्रेस की गला घोटने के जिक्र तक नही किये। साथ में यह भी लिखे कि मोदी सरकार के समय अभिव्यक्ति की आजादी है।
अगर अभिव्यक्ति की आजादी की बात करें तो सबसे पहला जुलाई 2017 में गोरखपुर मेडिकल कालेज मे इन फ्लाईटिस बिमारी से दर्जनो बच्चो के मरने के मामले में आक्सीजन की कमी की मामला उठाने वाले डाक्टर कफील पर ही रासुका लगाया गया।गृहमंत्रीजी बिष्ट सरकार का क्या यह कदम अभिव्यक्ति की आजादी के कुचलने का प्रयास नही था?

22 अगस्त 2019 को मिर्जापुर जिला के अंतर्गत हिनौता ग्राम पंचायत के गांव सिऊर मे प्राथमिक विद्यालय मे मिड मील में नमक रोटी परोसने की तथ्य को दिखाने वाले प्रत्रकार पवन जैसवाल व दो लोगों पर ही मुकदमा दर्ज करवाना कौन सी अभिव्यक्ति की आजादी थी? यह पहले चित्र मे प्रस्तुत भी है।
आर्मी मे ठीक खाना न मिलने के खिलाफ आवाज उठाने वाले तेजपाल यादव को नौकरी से निकाल दिया गया। यहां तक सत्ता के दुरूपयोग करके उसको वाराणसी से लोक सभा चुनाव से चुनाव भी नही लड़ने दिया गया जबकि कार्यवाही आर्मी के संबधित अधिकारियों पर होना चाहिए था ।क्या तेजपाल के आवाज को दबाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता थी?
मई 2020 में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में उनके द्वारा गोद लिये गये गांव डोमरी के निवासी माला देवी का रासन कार्ड न बनने व अन्य जन समस्या को उठाने वाली पत्रकार सुप्रिया पर मुकदमा दर्ज करवाना क्या प्रेस की स्वतंत्रता थी?
इसी साल दिल्ली के सिंध्दु बार्डर पर किसानों के आंदोलन को कवर करने वाले पत्रकार को मुकदमा करके तिहाड़ जेल मे बंद करना क्या वह प्रेस की स्वतंत्रता थी? यहां तक कि किसान आंदोलन को आंदोलनजीवी व परजीवी तक कहा गया।परजीवी खटमल जैसे जीव को कहा जाता है।तो क्या किसान खटमल है?
दिल्ली-हरियाणा व दिल्ली-गाजियाबाद बार्डर पर 26/11/2020 से चल रहे किसानों के धरना के आस पास लोहे की कील ठुकवा देना कि कोई व्यक्ति आंदोलन शामिल न हो सके।साथ ही साथ उनके बिजली पानी का कनेक्शन काट देना क्या यह किसी आपातकाल से कम है?
शांति पूर्वक आंदोलन करने वाले लोगों की जायज मांग को अनसुना कर देना उनके आंदोलन को हर तरह से कुचल देना क्या किसी आपातकाल से कम है? पिछले सात महीनों से किसानों के आंदोलन को अनसुना कर देना क्या यह आपातकाल नही है? भाजपा शासित राज्य युपी में हर धरना प्रदर्शन पर लाठी चार्ज करवा देना क्या यह आपातकाल नही है? लोगों को अपनी बात न कहने देना व हर समय धारा 144 लागाना क्या यह आपात काल नही है?
प्रधानमंत्री की आलोचना करना विनोद दुवा जैसे पत्रकार पर एफआईआर दर्ज करवा देना किस अभिव्यक्ति की आजादी थी? यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया।
यही नही वायर के संपादक सिध्दार्थ वरदराजन द्वारा युपी के मुख्यमंत्री बिष्टजी द्वारा लाक डाउन मे अयोध्या मे कार्यक्रम मे शामिल होने की खबर प्रकाशित करने पर मुकदमा दर्ज करवाना कौन सी अभिव्यक्ति व प्रेस की स्वतंत्रता थी? इन दोनो पत्रकार / एंकर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के विरोध मे 3500 वुध्दजीवी कानूनविद, अभिनेता,कलाकार साहित्यकार लोगों आवाज उठाये थे।
अगर कांग्रेस मे देश मे वंशवाद पनपा़ा तो संघ के इशारे पर भाजपा संविधान के विपरीत वर्णवादी व्यवस्था स्थापित करने की नीव रख दी जिसको किसी कीमत पर देश स्वीकार नही करेगा।लोक समाज पार्टी आप लोगों से अपील करती है है
आप लोक हित को केंद्र में रखकर संविधान के तहत देश मे समरसता लाने व गैरबराबरी खत्म करने की दिशा मे देश से जाना चाहते या भाजपा की संविधान के विपरीत वर्णवादीा व्यवस्था के तहत देश को ले जाना चाहते है? अगर नही तो लोक समाज पार्टी मे शामिल हो वर्णवादी व्यवस्था को खत्म करते हुये संविधान सम्मत सरकार चलाने के लिये व गैरबराबरी मिटाने मे योगदान दीजिये।लोक समाज पार्टी की वेबसाइट लोग आन करके निःशुल्क सदस्यता लीजिये धन्यवाद।
गौरी शंकर शर्मा (एडवोकेट)
राष्ट्रीय अध्यक्ष लोक समाज पार्टी
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