लोक समाज पार्टी:-
तीन कृषि बिल से देश के किसान तो बरबाद होगें ही बल्कि फूड कारपोरेशन आफ इंडिया बंद भी होगा।
दोस्तों प्रणाम–भक्तों को हमारी कोई भी राजनीतिक बात तीर के समान चुभती है क्योंकि उनको सच्चाई सुनने व देखने का आदत नही है।जो 15-20 किसान संसद भवन के पास आकर कृषिमंत्री नरेंद्र तोमरजी को पगड़ी बाधें हैं अगर वे अंध भक्त नही होगे तो वही आने वाले समय मे उनको जूतों की माला भी पहनायेगें।
नरेंद्रजी देश के साथ हमेशा छल किये हैं और अब भी कृषि बिल पर भी देश को गुमराह कर रहें। अभी हाल मे उन्होने सीमा के संबंध में ब्यान दिया था कि भारत के किसी भी भूभाग पर चीन का कोई कबजा नही हुआ है जबकि संसद मे ही रक्षा मंत्री इनके उलट ब्यान दिये हैं।जो कृषि बिल राज्य सभा में जबरजस्ती पास करवाये हैं उस कृषि उपज मंडी कानून से किसान अब सरकारी मंडी में नही प्राईवेट कंपनियों को अपना आनाज बेच सकेगें वे मिनिमम सपोर्ट प्राईस यानी एमएसपी से कम खरीदेगें जैसा कि अभी हाल में ही बिहार में मक्का की एमएसपी 1850 रूपये प्रति कुंतल था लेकिन वहां के किसान 9-11 सौ रूपये प्रति कुंतल मक्का निजी लोगों को बेचे हैं।

इस सरकार की मंशा फूड कारपोरेशन आफ इंडिया यानी एफसीआई को बंद करनेे की है।इस लिये यह कृषि उपज मंडी कानून लाया गया है अगर उनकी मंशा ठीक होती तो एफसीआई व मंडियो के लिये और नियुक्तियां करती, लेकिन ऐसा नही किया जा रहा है बल्कि जो हैं उनको जबरन रिटायर किया जा रहा है। यह सरकार पूंजीपतियों की थैली से बनी है जिनमें से कुछ पैसा बूथ भक्तों को इलेक्सन के समय मिलता हैं वे उसी हजार दो हजार रूपये लिये भाजपा को सपोर्ट करते हैं।
दूसरा कि कांट्रैक्ट फार्मिंग की बात कही गयी है।जैसे आजादी के पहले युरोपियन पलांट बिहार व बंगाल के ईशारे मे करते थे। इस दूसरे कृषि कानून से कोई कंपनी गांवों के किसानो के खेत को लीज पर लेगें लेकिन कम जोत के किसान अब तक अपना भी खेती करते थे और बड़े किसानों के खेत को बटाईदार बन कर खेती करते थे।यही नही भूमिहीन किसान भी बटाईदाार बनकर खेती करते थे आज उसी सिस्टम से देश की कृषि अर्थव्यवस्था कोरोना काल मे भी नही डगमगाई है, नही तो देश का और बुरा हाल होता। इस काम में ज्यादा तर दलित ओबीसी ही होते हैं ।यहां इस कांट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से कम जोत वाले व भूमिहीन किसान को तबाह करने की मंशा है गांवों मे बड़ी बड़ी मशीनें लगेंगी जिससे मजदूर कम लगेगें। उनके पास अब शहर के तरफ भागने के अलावा कोई विकल्प नही बचेगा ।इस कानून से शहर पर दबाव और बढेगा।
तीसरा बिल आवश्यक बस्तु अधिनियम को समाप्त करता है।अब आलू,प्याज ,अनाज, दलहन को आदि आवश्यक बस्तु नही माना जायेगा ।इन सबका असीमित भंडारण किया जा सकेगा मतलब जमाखोरी अब गैर कानूनी नही रहेगा।इसका भयावह परिणाम आने वाले दिनों देखने के मिलेगा।अभी इसी साल प्याज व टमाटर से दाम कितने अधिक हो गये थे।अब आलू की बारी है जिसका भाव बढ़ता जा रहा है।भाजपा,संघ व कांग्रेसी जमाखोर जब चाहेगे अपने-अपने गोदामों से आनाज-दलहन आदि बाजार में निकालेगे ही नही,कृत्रिम संकट पैदा करके दाम बढ़ा कर बेचेगें तब भक्तो को पता चलेगा कि नरेंद्रजी की ये तीनो कृषि कानून देश के लिये कितने घातक हैं।
कुल मिलाकर किसानों को अपने खेतों से अप्रत्यक्ष रूप से बेदखल करने की तैयारी है।यह व्यस्था की गयी है किसान जब अपना माल ले जायेगा तो उस पर टेल टैक्स नही देना पड़ेगा।सही मायने मे बड़ी बड़ी कृषि कंपनियों को माल को आसानी से ले जा सके उनको टोल टैक्स रहित करने के लिये यह सुविधा की गयी गयी।कौन किसान होगा कि वह अपना आनाज सैकड़ों किलोमीटर ढोकर दूसरे जगह बेचेगा?टोल से ज्यादा तो उसकी ढुलाई लग जायेगा।
आप लोगों से अपील की जाती है कि अब भी भाजपा, संघ व जुम्लेश्वरजी का साथ देशहित मे छोड़े,नही तो पूरे देश को कारपोरेट घरानों को गुलाम बनेगा क्योंकि यही भाजपा संघ का मूल उद्देश्य है।बाकी आप लोगों की मर्जी।धन्यवाद
गौरी शंकर शर्मा ( एडवोकेट)
राष्ट्रीय अध्यक्ष लोक समाज पार्टी
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