निजीकरण और ठेकेदारी के खिलाफ लोक समाज पार्टी का बिगुल: सकरा विधानसभा में नुक्कड़ सभा का आयोजन
बिहार में निजीकरण, ठेकेदारी और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर लोक समाज पार्टी ने एक बार फिर आवाज बुलंद की है। हाल ही में मुजफ्फरपुर जिले के सकरा विधानसभा क्षेत्र के सभा चौराहे पर एक नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष राम विलास महतो ने की। इस कार्यक्रम का संयोजन सकरा विधानसभा अध्यक्ष विनोद दास ने किया।
इस सभा में स्थानीय जनमानस की भारी भागीदारी देखने को मिली। इस मौके पर अमरेश ठाकुर, लाल मुनी देवी, ललिता देवी, विवेक देवी, गुलिया देवी, अनीता देवी, कमला देवी, राम सफल राम, अरुण राय, राज नारायण शाह, बिरजू शाह, सरफुद्दीन, उपेंद्र राम, प्रभात कुमार, मुकेश कुमार, मिथिलेश कुमार (एडवोकेट) समेत दर्जनों पार्टी कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष का उद्बोधन: निजीकरण के खिलाफ साफ़ संदेश
सभा को संबोधित करते हुए लोक समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट गौरी शंकर शर्मा ने कहा कि:
“लोक समाज पार्टी का विजन है – एक समाजवादी व्यवस्था की स्थापना, जहाँ हर सरकारी संपत्ति को जो निजी हाथों में चली गई है, उसे फिर से राष्ट्रीयकरण कर जनता के हक में लाया जाए।”
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश की संपत्ति जैसे अस्पताल, स्कूल, रेलवे, बिजली, पानी और हवाई जहाज़, सब कुछ अब ठेकेदारों और निजी कंपनियों के हवाले कर दिया गया है। पार्टी का लक्ष्य है इन सभी संसाधनों को दोबारा सरकार के अधीन लाकर आम जनता को उनका हक दिलाना।

बेरोजगारी और ठेकेदारी पर कड़ा प्रहार
गौरी शंकर शर्मा ने बिहार सचिवालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि:
“इन युवाओं को 10 से 16 हज़ार रुपये मासिक वेतन पर ठेकेदारी व्यवस्था में काम कराया जा रहा है, जबकि बाकी राशि ठेकेदारों की जेब में जा रही है – और यह सब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जानकारी में हो रहा है।”
उन्होंने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो कभी समाजवाद के पुरोधा माने जाते थे, वे आज निजीकरण और शोषण पर मौन साधे हुए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर कलंक बताया।
बदलाव की शुरुआत: बिगुल बज चुका है
लोक समाज पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि वे बिहार से बदलाव की शुरुआत करेंगे। पार्टी ने संकल्प लिया है कि सरकारी संपत्तियों को दोबारा सरकार के अधीन लाया जाएगा और बेरोजगार युवाओं को स्थायी, सुरक्षित और उचित वेतन वाली सरकारी नौकरियाँ दिलाई जाएंगी।
अंतिम विचार
निजीकरण और ठेकेदारी के खिलाफ लोक समाज पार्टी की यह मुहिम अब सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है। जनता की भागीदारी और समर्थन से यह स्पष्ट है कि लोग अब बदलाव चाहते हैं – एक ऐसा बदलाव जहाँ सरकार जनता के लिए काम करे, न कि कॉरपोरेट घरानों के लिए।
– लेखक: लोक समाज पार्टी समर्थक एवं सामाजिक विश्लेषक